छतरपुर के ताजमहल में खनकती है पायल, यहां 400 साल से शाम ढलते ही नो एंट्री - TAJ MAHAL OF BUNDELKHAND
छतरपुर के ताजमहल में खनकती है पायल, यहां 400 साल से शाम ढलते ही नो एंट्री - TAJ MAHAL OF BUNDELKHAND
आगरा का ताजमहल शाहजहां ने बेगम मुमताज की याद में बनवाया था. ऐसी ही एक धरोहर बुंदेलखंड के छतरपुर में है जहां 400 वर्ष से शाम होते ही अंदर जाने पर पाबंदी लग जाती है.
![]() |
| बुंदेलखंड के ताज महल का इतिहास भी आगरा के जैसा |
छतरपुर
बुंदेलखंड के छतरपुर जिला स्थित धुबेला में महाराजा छत्रसाल ने अपनी पहली पत्नी कमलापति की याद में समाधिस्थल बनवाया था. ये बिल्कुल हूबहू ताजमहल की भांति बना है. इसलिए लोग इसे 'बुंदेलखंड का ताजमहल' कहते हैं. आगरा का ताजमहल यमुना नदी के किनारे बना तो बुंदेलखंड का ताजमहल बड़े तालाब के किनारे बना है.
बुंदेलखंड के ताजमहल के अंदर की कलाकृति किसी भी मामले में आगरा के ताजमहल से कम नहीं है. खास बात ये है कि यहां शाम के बाद जाने पर प्रतिबंध है, क्योंकि शाम के बाद यहां पायलों की आवाजें गूंजती हैं. माना जाता है कि पायल की ये आवाजें महाराजा छत्रसाल की रानी कमलापति की ही हैं.
छतरपुर जिले के धुबेला में बुंदेलखंड का ताजमहल
गौरतलब है कि इसिहास के पन्नों में बुंदेलखंड के प्रतापी राजा महाराजा छत्रसाल का नाम अमर है. जब भी बुंदेलखंड की बात होती है तो जुबां पर राजा छत्रसाल का नाम जरूर आता है. छतरपुर के पास स्थित धुबेला में महाराजा छत्रसाल द्वारा अपनी पत्नी की याद में बनवाई गई समाधि के प्रति लोगों में आस्था भी है. इस समाधिस्थल में आज भी छत्रसाल की पहली पत्नी की पायलों की छन-छन करती आवाजें सुनाई देती हैं. इसी को देखते हुए शाम होते है यहां पर जाने पर प्रतिबंध है
![]() |
| ये है बुंदेलखंड का ताज महल |
इस ताजमहल की कलाकृति अचंभित करने वाली
दरअसल, महाराजा छत्रसाल अपनी पहली पत्नी से बहुत प्यार करते थे. पत्नी के निधन के बाद महाराजा छत्रसाल ने उनकी समाधि ऐसी बनवाई जो आज भी आगरा के ताजमहल से कम नहीं. तभी तो लोग इसे 'बुंदेलखंड के ताजमहल' के नाम से जानते हैं. छत्रसाल की पहली पत्नी कमलापति के महल को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. तालाब के दूसरी तरफ पहाड़ों की गोद में स्थित ये महल कारीगरी का बेहद शानदार नमूना है. रानी कमलापति की स्मृति में बनवाये गये इस स्मारक में 180 चित्रकलाएं हैं. ऊपरी खंड में 7 गुम्बद हैं, जिनमें 48 पंखुड़ियों वाले कमल के फूल हैं
![]() |
| छतरपुर जिले के धुबेला में बुंदेलखंड का ताजमहल |
करीब 400 साल पहले छत्रसाल ने बनवाया स्मारक
इतिहासकार बताते हैं "महाराजा छत्रसााल ने अपनी पहली पत्नी कमलापति की याद में अद्भुत स्मारक बनवाया था, जो कमल की पंखुड़ियों के आकार का बना हुआ है. हर खिड़की कमल के आकार पर बनी हुई है, जो 48 पंखुडियों पर निर्भर है. छत्रसाल की 5 शादियां हुईं, जिसमें कमलापति प्रमुख्य पत्नी थी. करीब 400 साल पहले छत्रसाल ने ये स्मारक बनवाया था, जिसमे आज भी महारानी की आवाजें, पायलो की छन-छन सुनाई देती है. इसलिए पुरातत्व विभाग यहां शाम ढलते में जाने पर रोक लगाई है.
अपनी पहली पत्नी की कमलापति की याद में ये स्मारक बनवाया था.
बुंदेलखंड के "महाराजा छत्रसाल ने अपनी पहली पत्नी कमलापति की याद में ये स्मारक बनवाया था. महाराजा की 5 शादियां हुई थीं. महारानी कमलापति धंधेरे राजाओं की बेटी थी. छत्रसाल महाराज अपनी पहली पत्नी से बहुत प्रेम करते थे. इस स्मारक को बुंदेलखंड के ताजमहल की तर्ज पर देखा जाता है.


