बवासीर की 5 आयुर्वेदिक दवाएं – Bawaseer Ki Ayurvedic Dawa
बवासीर (Piles) एक आम लेकिन बहुत ही तकलीफदेह बीमारी है। इसमें मलद्वार के पास नसें सूज जाती हैं, जिससे दर्द, जलन और कभी-कभी खून बहना जैसी समस्याएं होती हैं। आयुर्वेद में बवासीर को "अर्श" कहा जाता है और इसके उपचार के लिए कई प्रभावी दवाएं और उपाय बताए गए हैं। इस लेख में हम जानेंगे बवासीर की 7 प्रभावशाली आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में।

कांकायन वटी (Kankayan Vati)
कांकायन वटी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा है, जो विशेष रूप से बवासीर (अर्श) के इलाज के लिए उपयोग की जाती है। यह दवा कई औषधीय जड़ी-बूटियों जैसे अदरक, पिप्पली और हरीतकी से मिलकर तैयार की जाती है! गुदा की नसों में जमे खून को हटाए: बवासीर में गुदा के आसपास की नसों में खून जमने लगता है, जिससे दर्द और सूजन बढ़ती है। कांकायन वटी उस जमे हुए खून को घोलने में सहायक होती है।दर्द और सूजन में राहत: इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। भूख बढ़ाए और पाचन सुधारे: यह दवा भूख को बढ़ाती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है, जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है — जो बवासीर का एक प्रमुख कारण है।
सेवन विधि:
आमतौर पर यह वटी दिन में 2 बार भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ ली जाती है। मात्रा डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।
सावधानी:
किसी भी आयुर्वेदिक दवा का सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। गर्भवती महिलाएं इसका सेवन न करें।
त्रिफला गुग्गुल (Triphala Guggul)
त्रिफला गुग्गुल एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक दवा है जो पिप्पली, हरीतकी, विभीतकी, आंवला और गुग्गुल जैसी जड़ी-बूटियों से बनती है। यह गुदा की सूजन, दर्द और संक्रमण को कम करने में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से बवासीर के लक्षणों में राहत मिलती है। उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।
अंजीर (Fig)
अंजीर एक प्राकृतिक उपाय है जो बवासीर में राहत देता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज, गैस, जलन, खुजली और दर्द जैसे लक्षणों को कम करता है। रोजाना 2-3 अंजीर रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से अच्छा लाभ मिलता है।
मंजिष्ठा
रक्त की गंदगी साफ करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है। इसका उपयोग बवासीर के अलावा कैंसर, किडनी स्टोन, दस्त और पेचिश की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जाता है। मंजिष्ठा में ट्यूमर नष्ट करने वाले तथा ऊतकों को सिकोड़ने के गुण मौजूद होते हैं। बड़े से बड़े घाव को मंजिष्ठा आसानी से भर देती है। बवासीर में खून के थक्के गांठ के रूप में देखने को मिलते हैं। मंजिष्ठा के सेवन से यह जल्द ही नष्ट हो जाते हैं, इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर भी सामान्य रखने में मदद करती है। आप मंजिष्ठा का पाउडर, काढ़ा या पेस्ट का सेवन कर सकते हैं।
हरीतकी
हरीतकी को आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे गुणकारी औषधि माना जाता है। यह पाचन संबंधी बीमारियों को ठीक करने के लिए सदियों से उपयोगी है। कब्ज पर लगाम लगाकर यह मलत्याग के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है और अप्रत्यक्ष रूप से मस्सों को कम करने में सहायक होता है। बवासीर को ठीक करने के अलावा हरीतकी का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों में भी किया जाता है, जिसमें शरीर की कमजोरी को दूर करना, डायरिया को ठीक करना, गैस और कब्ज से राहत दिलाना आदि शामिल हैं।