ट्रंप बनाम चिनफिंग: टैरिफ वॉर की फिर से आहट?

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक बार फिर आमने-सामने हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त बयान देकर हलचल मचा दी — "टैरिफ से कोई देश नहीं बच पाएगा।" उनके इस बयान के तुरंत बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पलटवार करते हुए कहा, "टैरिफ वॉर में कोई विजेता नहीं होता, हमें व्यापार को बचाना चाहिए।"
ट्रंप की रणनीति: अमेरिका फर्स्ट 2.0?
ट्रंप का ये बयान उनके पुराने नारे "अमेरिका फर्स्ट" की याद दिलाता है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगर वो फिर से सत्ता में आते हैं, तो विदेशी सामानों पर भारी टैक्स लगाया जाएगा ताकि अमेरिकी उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। उनका मानना है कि ये रणनीति चीन और अन्य देशों को पीछे हटने पर मजबूर कर देगी।
चिनफिंग की चेतावनी: सबको होगा नुकसान
बैंकाक, एपी : चीन के निर्यात में मार्च में सालाना आधार पर 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं इसी अवधि में आयात में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। अमेरिका द्वॉरा चीन से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने सोमवॉर को यह जानकारी दी।
विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से निर्यात 2025 के पहले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात में सात प्रतिशत की गिरावट आई।
चीन का अमेरिका के साथ व्यापार सरप्लस मार्च में 27.6 अरब डॉलर रहा, जबकि इसके निर्यात में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष की पहली (जनवरी-मार्च) तिमाही में अमेरिका के साथ चीन का व्यापार सरप्लस 76.6 अरब डॉलर रहा।
चिनफिंग ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि व्यापार युद्ध कोई हल नहीं है। उनका साफ संदेश था कि इस तरह के फैसले न सिर्फ अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
क्या लौटेगा 2018 वाला दौर?
जब 2018 में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर छिड़ा था, तब ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अब ट्रंप फिर से चुनावी मैदान में हैं और उनकी टैरिफ पॉलिसी फिर से बहस में आ गई है।
भारत पर क्या असर?
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ये तनाव चिंता की बात है। एक तरफ अमेरिका बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, वहीं चीन से भी कई कच्चे माल और तकनीकी उपकरण आयात किए जाते हैं। अगर टैरिफ वॉर दोबारा शुरू होता है, तो इसकी कीमत भारत को भी चुकानी पड़ सकती है।
दुनिया पहले ही महामारी, महंगाई और जियो-पॉलिटिकल तनाव से जूझ रही है। ऐसे में एक और टैरिफ वॉर किसी के भी हित में नहीं होगा। अब देखना यह है कि क्या ये बयानबाज़ी महज़ चुनावी रणनीति है या सच में हम एक नए आर्थिक युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं।