"MP में प्रेम में पागल टीचर का हैरान कर देने वाला कदम!"
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| पत्नी की याद में बनवाया प्रेम प्रतीक मंदिर namastebharat7 |
छतरपुर (मनोज सोनी):
प्यार की मिसालें अक्सर इतिहास के पन्नों में ही मिलती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक रिटायर्ड शिक्षक ने जो किया, उसने मुहब्बत की परिभाषा को एक बार फिर से जीवंत कर दिया है। जिस तरह मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेपनाह मोहब्बत को अमर करने के लिए मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था, ठीक उसी तरह छतरपुर के इस शिक्षक ने अपनी पत्नी के निधन के बाद उसकी स्मृति में एक "प्रेम मंदिर" बनवाकर सबको चौंका दिया है।
इस शिक्षक ने अपनी जीवनभर की कमाई, अपनी बचत, अपनी पेंशन और सपनों को एक जगह समेटकर एक ऐसा मंदिर बनवाया, जो सिर्फ पत्थरों से नहीं, बल्कि दिल से गढ़ा गया है। यह मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि यह उस प्रेम की पहचान है जो जन्मों-जन्म तक मिसाल बनकर कायम रहेगा।
आज यह प्रेम मंदिर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर गली, हर चौक पर लोग इस दंपत्ति की प्रेम कहानी के बारे में बात कर रहे हैं। यह कहानी लोगों को ये एहसास करा रही है कि सच्चा प्यार सिर्फ किताबों या फिल्मों तक ही सीमित नहीं है—वह आज भी जिंदा है, बस देखने वाली नजर चाहिए।
पत्नी की याद में बना "प्रेम मंदिर": एक सच्चे प्रेम की अमर निशानी
छतरपुर, मध्यप्रदेश – कहते हैं सच्चा प्यार कभी मरता नहीं, वह समय के साथ और भी गहरा होता चला जाता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं छतरपुर शहर के चौबे कॉलोनी निवासी रिटायर्ड शिक्षक बी.पी. चंसोरिया, जिन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में ऐसा काम कर दिखाया, जो हर किसी को भावुक कर देता है।
बी.पी. चंसोरिया ने अपनी पत्नी स्व. वंदना
चंसोरिया के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और प्रेम को अमर बनाने के लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया है। यह मंदिर उन्होंने छतरपुर के प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर परिसर में बनवाया है, जिसकी लागत करोड़ों में बताई जा रही है। खास बात यह है कि इस मंदिर का नाम उन्होंने "प्रेम मंदिर" रखा है – जो न सिर्फ एक इमारत है, बल्कि एक गहरी भावना, एक सच्चे रिश्ते की चमकती हुई मिसाल है।
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| रिटायर्ड शिक्षक बीपी चंसोरिया की पत्नी स्व. वंदना चंसोरिया ( |
इस मंदिर के निर्माण में चंसोरिया जी ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई, पेंशन और सेविंग्स तक खर्च कर दी। उन्होंने अपने निजी सपनों से ज्यादा अपनी पत्नी की स्मृति को प्राथमिकता दी और इसे एक पवित्र रूप में दुनिया के सामने पेश किया।
आज इस प्रेम मंदिर को देखने के लिए न सिर्फ छतरपुर बल्कि आस-पास के जिलों और दूर-दराज के इलाकों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले हर व्यक्ति को यह एहसास होता है कि सच्चा प्यार आज भी जिंदा है, और उसका सबसे बड़ा उदाहरण यही मंदिर है।
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| छतरपुर में राधा-कृष्ण का भव्य मंदिर |
छतरपुर के उत्कृष्ट विद्यालय से सेवानिवृत्त शिक्षक बी.पी. चंसोरिया की पत्नी, वंदना चंसोरिया का 30 नवंबर 2016 को अचानक निधन हो गया था। बी.पी. चंसोरिया अपनी पत्नी वंदना से बेइंतहा मोहब्बत करते थे। पत्नी के निधन ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया, लेकिन उनका प्रेम ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया।

अपनी पत्नी की यादों को जीवंत रखने और प्रेम की मिसाल कायम करने के उद्देश्य से उन्होंने एक मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से छतरपुर के नरसिंह मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण का एक भव्य और दिव्य प्रेम मंदिर बनवाया।
इस मंदिर का निर्माण राजस्थान के कुशल कलाकारों द्वारा किया गया, जो अपनी सुंदर कारीगरी के लिए प्रसिद्ध हैं। मंदिर का भूमि पूजन 13 मई 2017 को किया गया था और वर्ष 2023 में यह मंदिर पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक ऐसी प्रेम कहानी की गवाही भी देता है, जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है।
Yah kahani sachche pyaar ki ek mishal Hai


